नवीं अनुगूंज: आशा ही जीवन है

आशा ही जीवन हैबात सही है। आशा इस समय करोड़ों हिन्दुस्तानियों के लिये सचमुच जीवन है, बेचारे अच्छी सड़कों की आशा कर रहे हैं, बिजली-पानी की आशा कर रहे हैं, पौष्टिक भोजन की आशा करते हैं, बच्चों की बेहतर शिक्षा की आशा करते हैं, कुल मिलाकर अच्छे जीवन की आशा करते हैं, उसमें ही पूरा जीवन निकल जाता है, सचमुच में आशा जीवन समान ही है।
आशा पे ही तो ये देश चल रहा है, ये सबके लिये जीवन है। राजनीतिकों के लिये इस संदर्भ में कि कब वो लोकसभा और विधानसभा के लिये चुने जायें और कब जनता के पैसे को लूटें। नौकरशाहों के लिये भी कुछ ऐसा ही है। उच्च, उच्च-मध्यम और मध्यम वर्गीय बच्चों के लिये कि कब पढ़लिख कर विदेश जायें, यही आशा है। माता-पिता के लिये ये आशा है कि कब बच्चा बड़ा हो और उनके लिये एक गोरी से बहू लाये और साथ में खूब सारा माल। और अनेकोनेक उदाहरण हैं आशा के। और ये आशायें पूरी हो जाती हैं और लोग अपना जीवन सार्थक समझते हैं।
केवल कुछ आशायें बिखर जाती है और जीवन पर्यंत आशा ही रह जाती हैं: जैसे कि किसान द्वारा जीवन में सुधार की आशा, जमादारा द्वारा इसकी आशा कि कब उसे लोग छूने से न मुंह फेरें, मजदूरों द्वारा अच्छे जीवन की आशा इत्यादि।ो
सच में आशा हर मायने में जीवन है, कुछ को जीवन देती है और कुछ के साथ जीवन भर रहती है बिना कुछ दिये।

