धर्म का महत्व

अब जब धर्म के महत्व की बारी आयी है तो मरा मानना है कि धर्म एक तरह का ज़हर है, मानसिक विष है। धर्म के प्रतिपादकों का आध्यात्मिकता से कोई वास्ता नहीं था। धर्म लोगों को बांटने के काम आता है न कि जोड़ने के। लोगों के मन में अलगाव के बीज डालता है, अपने धर्म को मानने वाली कौम की श्रेष्ठता की भावना डालता है।
इस दुनिया में आदमी पहले आया था न कि धर्म, और इसलिये अगर कोई धर्म जैसी चीज़ है तो वो है इंसानियत न कि हिन्दू या मुसलमान या ईसाई। ये सारे तो आडम्बर और रीति रिवाज़ों वाले धर्म हैं जो लोग एक दूसरे के ऊपर थोप रहे हैं, इनको मानने वाले ज़्यादातर लोगों का इंसानियत से कोई लेना देना नहीं है, ज़रूरत पड़ने पर ये लोग एक दूसरे की गर्दन उड़ा सकते हैं, इतिहास गवाह है।


3 Comments:
बाप रे! बेहद सटीक भाषा में विचार व्यक्त किये हैं आपने. ऐसे ही साफ-साफ दो टुक शब्दो में बात होनी चाहीए, गोल-गोल घुमावदार नहीं.
Well , In idia esp religion and caste has been used as a mean of politics simply based upon the concept of divide and rule .
Earlier it was excercised by Britishers and now by our politicians .
हिन्दुत्व अथवा हिन्दू धर्म
हिन्दुत्व एक जीवन पद्धति अथवा जीवन दर्शन है जो धर्म, अर्थ, काम, मोक्षको परम लक्ष्य मानकर व्यक्ति या समाज को नैतिक, भौतिक, मानसिक, एवं आध्यात्मिक उन्नति के अवसर प्रदान करता है।आज हम जिस संस्कृति को हिन्दू संस्कृति के रूप में जानते हैं और जिसे भारतीय या भारतीय मूल के लोग सनातन धर्म या शाश्वत नियम कहते हैं वह उस मजहब से बड़ा सिद्धान्त है जिसे पश्चिम के लोग समझते हैं।
अधिक के लिये देखियेः http://vishwahindusamaj.com
Post a Comment
<< Home