तरबूज की वाइन बनाने की विधि
कुछ मित्रों के कहने पर मैं तरबूज की वाइन बनाने की विधि लिख रहा हूं:
सामग्री:
1. पहले तरबूज को काट लें। काट के तरबूज के गूदे को अच्छे से मसल के उसका जितना संभव हो उतना जूस निकाल लें। 8 किलो के तरबूज से करीब 4 लीटर जूस निकलेगा। जूस में शक्कर मिला कर घोल लें। शक्कर ज़रूरी है क्योंकि तरबूज का जूस ज़्यादा मीठा नहीं होता है इसलिये बिना शक्कर के अल्कोहल की मात्रा कम बनती है। जूस को अच्छे से छान लें ताकि बीज और रेशे न रहें।
2. मर्तबान को उबले हुये ठंडे किये पानी में सोडियम मेटाबाइसल्फाइट डाल के साफ कर लें।
3. अब २ चम्मच यीस्ट को एक कप शुष्म गर्म पानी में थोड़ा देर रख दें जिससे कि यीस्ट कार्यान्वित यानी एक्टीवेट हो जाये। आधे घन्टे में काफ़ी झाग पैदा हो जाता है।
4. अब शक्कर मिले हुये जूस को मर्तबान में भरकर उसमें यीस्ट डाल दें और मर्तबान की गर्दन पर एक कपड़ा अच्छे से बांध दें और मर्तबान को १२ घंटे के लिये अंधेरी और ठंडी (मतल जहां तापमान करीब २०-२५ सेंटीग्रेड के बीच हो) जगह पर रख दें। इस समय शुरुआती खमीरीकरण होगा।
5. १२ घंटे बाद कपड़े को हटाकर उसकी जगह मर्तबान की गर्दन में कार्क कसकर लगा दें और कार्क के छेद में यू ट्यूब यानी वाटरलाक लगा दे और ट्यूब में इतना पानी भरें कि पानी अंदर न जाये और बाहर की ऑक्सीजन अंदर न जा सके। वाइन बनने के दौरान अंदर पैदा होने वाली गैस पानी के रास्ते बाहर चली जायेगी। अब इसको फिर से उसी ठंडी व अंधेरी जगह रख दें।
6. आप पायेंगे के शुरुआत के करीब एक हफ़्ते में मर्तबान में बहुत बुलबुले बनते हैं। इसका मतलब आपका यीस्ट ठीक से काम कर रहा है और अल्कोहल बन रहा है। करीब एक हफ़्ते बाद बुलबुले बनने की रफ़्तार मंद पड़ जायेगी और तीन हफ़्ते में एक दम बन्द हो जायेगी। मर्तबान को करीब डेढ़ महीने तक ऐसे ही रखा रहने दें। बीच बीच में वाटरलाक में पानी देखते रहें कि कही पानी खत्म न हो जाये और आपकी वाइन आक्सीडाइज न हो जाये। पानी के स्तर को बीच बीच में देखते रहना और भरते रहना आवश्यक है
7. डेढ़ दो महीने बाद आप पायेंगे कि जूस का ज़्यादातर मलबा नीचे जम गया है और ऊपर का द्रव काफ़ी पारदर्शी है। अब आपकी वाइन लगभग तैयार है।
8. अब मर्तबान का ढक्कन खोलकर तरल व पारदर्शी वाइन को सावधानी एक पतली रबर की स्टरलाइज़ की हुई ट्यूब से दूसरे स्टरलाइज किये बड़े बर्तन में स्थानान्तरित करें और इसमें एक छोटी चम्मच या स्वादानुसार टैनिन मिला लें और अच्छे से मिला लें। टैनिन मिलाने से पहले आप वाइन का अल्कोहल स्तर भी माप सकते हैं। इसको हाइड्रोमीटर से मापते हैं, उसमें एक सूचक होता है जो कि वाइन के घनत्व को दर्शाता है। घनत्व का मान वाइन के अल्कोहल स्तर से जुड़ा रहता है जिसको कि आप चार्ट पर देख सकते हैं।
हाइड्रोमीटर बनाने की विधि
9. मर्तबान में जमे मलबे को फेंककर और फिर उसको अच्छे से धोकर व स्टरलाइज़ करके उसमें टैनिन मिली वाइन को फिर से डाल लें।
10. फिर से मर्तबान में वाटरलाक लगा दें और वाइन को दो तीन महीने तक रख दें। दो तीन महीने के के बाद वाइन एक दम तैयार हो जायेगी और पीने लायक हो जायेगी। आप चाहें तो और ज़्यादा समप तक वाइन को मर्तबान में छोड़ सकते हैं। जितना ज़्यादा समय देंगे, उतनी ही अच्छी वाइन बनेगी।
11. फिर वाइन को निकाल कर रबर ट्यूब से निकाल कर गहरे रंग की वाइन की बोतलों में भर लें और कार्क लगा कर सील कर दें।
12. वाइन का आनंद लें और बतायें कि कैसी थी आपकी वाइन।
सामग्री:
- एक बड़ा तरबूज (करीब 7-8 किलो का)
- ढाई किलो शक्कर
- यीस्ट
- सोडियम मेटाबाइसल्फाइट,
- एक बड़ा मर्तबान जिसकी गर्दन संकरी हो और उसमें ऊपर से ढक्कन अच्छे से फिट होता हो,
- वाटर लॉक (एक U-आकार की ट्यूब जिसमें पानी ऐसे डालना चाहिये कि पानी न तो वाइन के अन्दर जाये और न ही खुद बाहर जाये, बस ऑक्सीजन को अंदर जाने से रोके और वाइन बनने की प्रक्रिया में पैदा हुई गैस को निकालने के लिये), ट्यूब को ढक्कन के बीच में ट्यूब के आकार का छेद करके उसमें फिट करना पड़ेगा
- टैनिन (वाइन में टैन्जी स्वाद पैदा करने के लिये)- वैकल्पिक
- हाइड्रोमीटर
- थोड़ा सा धैर्य
1. पहले तरबूज को काट लें। काट के तरबूज के गूदे को अच्छे से मसल के उसका जितना संभव हो उतना जूस निकाल लें। 8 किलो के तरबूज से करीब 4 लीटर जूस निकलेगा। जूस में शक्कर मिला कर घोल लें। शक्कर ज़रूरी है क्योंकि तरबूज का जूस ज़्यादा मीठा नहीं होता है इसलिये बिना शक्कर के अल्कोहल की मात्रा कम बनती है। जूस को अच्छे से छान लें ताकि बीज और रेशे न रहें।
2. मर्तबान को उबले हुये ठंडे किये पानी में सोडियम मेटाबाइसल्फाइट डाल के साफ कर लें।
3. अब २ चम्मच यीस्ट को एक कप शुष्म गर्म पानी में थोड़ा देर रख दें जिससे कि यीस्ट कार्यान्वित यानी एक्टीवेट हो जाये। आधे घन्टे में काफ़ी झाग पैदा हो जाता है।
4. अब शक्कर मिले हुये जूस को मर्तबान में भरकर उसमें यीस्ट डाल दें और मर्तबान की गर्दन पर एक कपड़ा अच्छे से बांध दें और मर्तबान को १२ घंटे के लिये अंधेरी और ठंडी (मतल जहां तापमान करीब २०-२५ सेंटीग्रेड के बीच हो) जगह पर रख दें। इस समय शुरुआती खमीरीकरण होगा।
5. १२ घंटे बाद कपड़े को हटाकर उसकी जगह मर्तबान की गर्दन में कार्क कसकर लगा दें और कार्क के छेद में यू ट्यूब यानी वाटरलाक लगा दे और ट्यूब में इतना पानी भरें कि पानी अंदर न जाये और बाहर की ऑक्सीजन अंदर न जा सके। वाइन बनने के दौरान अंदर पैदा होने वाली गैस पानी के रास्ते बाहर चली जायेगी। अब इसको फिर से उसी ठंडी व अंधेरी जगह रख दें।
6. आप पायेंगे के शुरुआत के करीब एक हफ़्ते में मर्तबान में बहुत बुलबुले बनते हैं। इसका मतलब आपका यीस्ट ठीक से काम कर रहा है और अल्कोहल बन रहा है। करीब एक हफ़्ते बाद बुलबुले बनने की रफ़्तार मंद पड़ जायेगी और तीन हफ़्ते में एक दम बन्द हो जायेगी। मर्तबान को करीब डेढ़ महीने तक ऐसे ही रखा रहने दें। बीच बीच में वाटरलाक में पानी देखते रहें कि कही पानी खत्म न हो जाये और आपकी वाइन आक्सीडाइज न हो जाये। पानी के स्तर को बीच बीच में देखते रहना और भरते रहना आवश्यक है
7. डेढ़ दो महीने बाद आप पायेंगे कि जूस का ज़्यादातर मलबा नीचे जम गया है और ऊपर का द्रव काफ़ी पारदर्शी है। अब आपकी वाइन लगभग तैयार है।
8. अब मर्तबान का ढक्कन खोलकर तरल व पारदर्शी वाइन को सावधानी एक पतली रबर की स्टरलाइज़ की हुई ट्यूब से दूसरे स्टरलाइज किये बड़े बर्तन में स्थानान्तरित करें और इसमें एक छोटी चम्मच या स्वादानुसार टैनिन मिला लें और अच्छे से मिला लें। टैनिन मिलाने से पहले आप वाइन का अल्कोहल स्तर भी माप सकते हैं। इसको हाइड्रोमीटर से मापते हैं, उसमें एक सूचक होता है जो कि वाइन के घनत्व को दर्शाता है। घनत्व का मान वाइन के अल्कोहल स्तर से जुड़ा रहता है जिसको कि आप चार्ट पर देख सकते हैं।
हाइड्रोमीटर बनाने की विधि
9. मर्तबान में जमे मलबे को फेंककर और फिर उसको अच्छे से धोकर व स्टरलाइज़ करके उसमें टैनिन मिली वाइन को फिर से डाल लें।
10. फिर से मर्तबान में वाटरलाक लगा दें और वाइन को दो तीन महीने तक रख दें। दो तीन महीने के के बाद वाइन एक दम तैयार हो जायेगी और पीने लायक हो जायेगी। आप चाहें तो और ज़्यादा समप तक वाइन को मर्तबान में छोड़ सकते हैं। जितना ज़्यादा समय देंगे, उतनी ही अच्छी वाइन बनेगी।
11. फिर वाइन को निकाल कर रबर ट्यूब से निकाल कर गहरे रंग की वाइन की बोतलों में भर लें और कार्क लगा कर सील कर दें।
12. वाइन का आनंद लें और बतायें कि कैसी थी आपकी वाइन।


2 Comments:
"मय बरसती है , फिज़ाओं में नशा तारी है
मेरे साकी ने कहीं जाम उछाले होंगे "
:)
it's better to see sell home quick
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