tag:blogger.com,1999:blog-8947177.post113534970312621222..comments2007-04-15T13:37:54.240-07:00Comments on मेरा चिट्ठा: शोर की संस्कृतिआशीषhttp://www.blogger.com/profile/15373573505567241038noreply@blogger.comBlogger2125tag:blogger.com,1999:blog-8947177.post-1136685214748426612006-01-07T17:53:00.000-08:002006-01-07T17:53:00.000-08:00सत्य वचन बोले बच्चन. जब मैं देश गया था तो हल्ला सु...सत्य वचन बोले बच्चन. जब मैं देश गया था तो हल्ला सुन-२ के मेरा सिर लगातार दुखता रहता था. लोग हँसी उङाते थे और में कुछ शर्मिंदा रहता था मानो मेरी ही गलती है. फिर मैने इयर बड लगा कर ही पब्लिक मैं घूमना शुरु कर दिया. जो पूछे उसको बोल देता था कान में ईन्फैक्शन है :)Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/01395502587164843849noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-8947177.post-1136640436119366072006-01-07T05:27:00.000-08:002006-01-07T05:27:00.000-08:00मैं आपके विचारों से पूरी तरह सहमत हूँ। ऐसा लगता है...मैं आपके विचारों से पूरी तरह सहमत हूँ। ऐसा लगता है मानो शोर-शराबा हमारे जीवन का एक अंग बन चुका हो। इसी आशय का एक लेख कादम्बिनी के जनवरी अंक में 'शोर की अखिल भारतीय संस्कृति' के नाम से भी प्रकाशित हुआ है।Pratikhttp://www.blogger.com/profile/02460951237076464140noreply@blogger.com