tag:blogger.com,1999:blog-8947177.post-1129970402925383492005-10-22T01:27:00.000-07:002005-10-22T01:41:41.750-07:00आई आई टी में कवि सम्मेलनकल आई आई टी कानपुर में अंतराग्नि के अवसर पर कवि सम्मेलन 'कलरव' का आयोजन किया गया। कविश्रेष्ठ श्री अशोक चक्रधर के अतिरिक्त सर्वेश अस्थाना, प्रदीप चौबे, आशीष अनल और विष्णु सक्सेना जी भी वहां मौज़ूद थे।<br /><br />अशोक चक्रधर जी ने जहां एक पेपर बेचने वाले गरीब के पसीने की कीमत को बयान किया, कुछ ऐसे;<br /><br /><blockquote>एक बार चक्रधर जी जा रहे थे कार से कि एक पेपर बेचने वाले ने लाल बत्ते पर शीशा खटखटाया,<br />पूछा पेपर लोगे, ५० के ५ डब्बे, ४९ मूल्य है, मेरी कमाई केवल, १ रूपये।<br /><br />कविराज ने पूछा कि इससे पसीना पुछता है<br />उसने कहा कि लिपिस्टिक पुछती है, काजल पुछता है, और न जाने क्या क्या पुछता है<br />पर जनाब जो ये पेपर खरीद सकते हैं उनको पसीना नहीं आता।<br /><br />पसीना तो हम जैसों को आता है<br />जो कि उसको अपनी कमीज के आस्तीन से पोछ लेते हैं<br /></blockquote><br />वहीं वीर रस के कवि अनल जी ने हमारे नेताओं की खूब खबर ली और मज़हब के नाम पर लड़ाने वालों को जम के लताड़ा।<br /><br />चौबे जी ने गंजो के सिर पर दो बालों (बाल और बालिनी) की शादी को बयान किया तो वहीं अस्थाना जी ने दहेज के नाम पर समाज पर कटाक्ष किये।<br /><br />विष्णु जी श्रंगार रस के कवि हैं और बहुत ही अच्छा गाते हैं। इन्होंने जवान दिलों को गुदगुदाने वाली कविताओं से समा बांध दिया।<br /><br />कुल मिलाकर कवि सम्मेलन सुपरहिट रहा और शायद <span style="font-weight: bold;">अंतराग्नि </span>का सबसे अच्छा कार्यक्रम।<br /><br />शायद लोगों को समझ में आया होगा कि मातृभाषा से जो व्यक्त किया जा सकता है, वो आंग्लभाषा से नहीं।आशीषhttp://www.blogger.com/profile/15373573505567241038noreply@blogger.com