यमुना और थेम्स
यमुना और थेम्स दो विशाल नदियां हैं जो क्रमश: भारत और ब्रिटेन की राजधानियों में बहती हैं। हम यमुना को यमुना मैया कहते हैं और जिसके लिये यमनोत्री नामक तीर्थ भी है और इसका इतिहास थेम्स से कहीं ज़्यादा पुराना और गौरव शाली है। और दूसरी तरफ़ थेम्स बहुत छोटी है और उसको कोई बहन बेटी भी नहीं बोलता है। पर फ़र्क सिर्फ़ इतना है:
थेम्स की तस्वीर

यमुना की तस्वीर
क्या हम सच में अपने देश की धरोहरों के साथ खिलवाड़ नहीं कर रहे हैं। गंगा का बुरा हाल है, ऋशिकेष में जाकर गंगा को देखें, पोलीथीन से सराबोर है कभी की सुन्दर और विशाल गंगा, कानपुर में आकर तो विषैली हो जाती है। आज वो गंगा और यमुना नहीं मिलती हैं जो कि मैं बचपन में देखता था और वहां लगभग रोज़ नहाता था। भारत जैसे विशाल और विविधता वाले देश की प्राकृतिक सुंदरता का जो ह्रास आज इसका खुद का बाशिन्दा कर रहा है वो बहुत ही दुख की बात है और चिंता का विषय है। अगर ऐसे ही जंगलों, पहाड़ों और नदियों का विनाश चलता रहा तो इस देश में क्या बचेगा? सीमेंट, लोहा और प्लास्टिक और इंसान के रूप में हैवान वन संपदा के नष्ट होने के साथ जीव जन्तु भी नष्ट हो जायेंगे। तब भी शायद ही अकल आये हमारे लोगों को! पैसे के लिये आदमी क्या क्या कर सकता है ये भारत में सही देखने को मिल रहा है।
- यमुना नदी से नाला बनने की कगार पर है और कई जगह बन भी गई है और थेम्स तो नाले से नदी बना दिया है।
- यमुना के किनारे टट्टी के ढ़ेर मिलेंगे और थेम्स के किनारे लंदन की आंख या लंडन आई।
- यमुना के किनारे गरीब लोग झुग्गी झोपड़ियों में रहते रहते हैं और थेम्स के किनारे लोगों को मकान मिलना नसीब नहीं होता है।
- यमुना में सस्ती नावें चलती हैं जिनमें कि आजकल शायद कोई ही बैठना चाहता होगा और थेम्स में स्टीमर चलते हैं जिनमें एक क्रूज़ लेने के लिये कई पाउंड खर्च हो जायेंगे।
- यमुना के किनारे पर शायद ही कोई कवि सम्मेलन या इसके जैसे समारोहों का आयोजन किया जाता हो। थेम्स के किनारे कई बहुत सुन्दर हाल हैं जहां पर अन्तर्राष्ट्रीय समारोहों का आयोजन किया जाता है जिनकी टिकट १० पाउंड से लेकर ५० पाउंड तक होती है (८०० रूपये से ४००० रूपये तक)।
- यमुना के किनारे गैरकानूनी मकान बनना आम बात है और थेम्स के किनारे कोई बना नहीं सकता है।
- यमुना में दिल्ली की सारी फ़ैक्टरियों का प्रदूषित कचरा जाता है और थेम्स में यदि कोई बहा दे तो उसकी खैर नहीं।
थेम्स की तस्वीर
यमुना की तस्वीरक्या हम सच में अपने देश की धरोहरों के साथ खिलवाड़ नहीं कर रहे हैं। गंगा का बुरा हाल है, ऋशिकेष में जाकर गंगा को देखें, पोलीथीन से सराबोर है कभी की सुन्दर और विशाल गंगा, कानपुर में आकर तो विषैली हो जाती है। आज वो गंगा और यमुना नहीं मिलती हैं जो कि मैं बचपन में देखता था और वहां लगभग रोज़ नहाता था। भारत जैसे विशाल और विविधता वाले देश की प्राकृतिक सुंदरता का जो ह्रास आज इसका खुद का बाशिन्दा कर रहा है वो बहुत ही दुख की बात है और चिंता का विषय है। अगर ऐसे ही जंगलों, पहाड़ों और नदियों का विनाश चलता रहा तो इस देश में क्या बचेगा? सीमेंट, लोहा और प्लास्टिक और इंसान के रूप में हैवान वन संपदा के नष्ट होने के साथ जीव जन्तु भी नष्ट हो जायेंगे। तब भी शायद ही अकल आये हमारे लोगों को! पैसे के लिये आदमी क्या क्या कर सकता है ये भारत में सही देखने को मिल रहा है।


