अचरज: रामधारी सिंह दिनकर
आज कादम्बिनी में स्वर्गीय कविवर रामधारी सिंह दिनकर के बारे में एक लेख पढ़ा और उनके खोये हुये काव्य 'विजय संदेश' के मिलने के बारे में पढ़ा। उसी लेख की एक कविता पढ़ी जो अच्छी लगी और लिख रहा हूं।
-'विजय संदेश' से
थी खबर किसको किसानों की हरे! हुंकार की
हो चलेगी धार भोथी, तेग वो तलवार की
झूमकर यो हंस भी झंडे तले आ जायेंगे
धज्जियां उड़ जायेंगी तों दर्प के दीवार की
'कर नहीं हां शीश देंगे' पंज ये ठन जायेगा
मत्त गज परवा करेगा सिंह के ललकार की
कत्ल कर बांधो कमर हम भी डटे हैं सामने
धार बतला दें इधर हम भी ज़रा तलवार की
लाख भी थे ये कहीं पर वीरता कहते इसे
शत्रुओं के खंजरों की धार हो बेकार की
उड़ गये होश 'विल्सन' ने कहा था कांपकर
जान आफ़त में पड़ी है आज दिन सरकार की
-'विजय संदेश' से

