Sunday, September 11, 2005

अचरज: रामधारी सिंह दिनकर

आज कादम्बिनी में स्वर्गीय कविवर रामधारी सिंह दिनकर के बारे में एक लेख पढ़ा और उनके खोये हुये काव्य 'विजय संदेश' के मिलने के बारे में पढ़ा। उसी लेख की एक कविता पढ़ी जो अच्छी लगी और लिख रहा हूं।

थी खबर किसको किसानों की हरे! हुंकार की

हो चलेगी धार भोथी, तेग वो तलवार की


झूमकर यो हंस भी झंडे तले आ जायेंगे

धज्जियां उड़ जायेंगी तों दर्प के दीवार की


'कर नहीं हां शीश देंगे' पंज ये ठन जायेगा

मत्त गज परवा करेगा सिंह के ललकार की


कत्ल कर बांधो कमर हम भी डटे हैं सामने


धार बतला दें इधर हम भी ज़रा तलवार की



लाख भी थे ये कहीं पर वीरता कहते इसे


शत्रुओं के खंजरों की धार हो बेकार की



उड़ गये होश 'विल्सन' ने कहा था कांपकर


जान आफ़त में पड़ी है आज दिन सरकार की


-'विजय संदेश' से

Wednesday, September 07, 2005

भारत का विकास

खबर है कि यदि संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार तो भारत को विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में आने में अभी फिलहाल १०० साल और हैं तो कम से कम आज की पीढ़ी तो ये सपना देखना छोड़ ही सकती है। वैसे कलाम साहब और हमारे राजनीतिज्ञ तो २०२० तक भारत को विकसित बनाने में तुले हैं। देखें किसकी बात रही निकलती है। कम से कम ३०-४० साल की तो उमर बाकी है अभी, लक्षण तो नज़र आ ही जायेंगे।

पू्री रिपोर्ट

हिन्दी फ़िल्में और उनके कलाकारों की हिन्दी

मैं टीवी पर देखते देखते तंग आ गया हूं कि ये जो फ़िल्मी सितारे हैं इनका हिन्दी चैनल पर साक्षात्कार देते समय इनकी भाषा का चैनल अंग्रेज़ी में क्यों तब्दील हो जाता है, जबकि नाम और शानोशौकत ये उसी हिन्दी की बदौलत ही कमाते हैं। क्या वेगैरत लोग हैं? इनको हिन्दी बोलने में इतनी तकलीफ़ क्यों है? भाई अपनी और अपने ही देश की भाषा है। और तो और, हिन्दी फ़िल्मों की कास्टिंग और कैसेट सीडी के डब्बों पर भी सब अंग्रेज़ी या रोमन लिपि में ही लिखा रहता है जो कि निहायत बकवास है।